Virat Kohli And Sachin Tendulkar: एशिया कप 2022 में अफगानिस्तान के खिलाफ विराट कोहली के शतक से संकेत मिलता है कि सचिन तेंदुलकर की तरह वो फॉर्म में वापस लौट गए हैं

नई दिल्ली : जब विराट कोहली का बल्ला बोलता है तो पुराने रिकॉर्ड झड़ने लगते हैं। यही एशिया कप में अफगानिस्तान के खिलाफ हुआ। जब कोहली ने ढाई साल का सूखा रनों की बारिश से धो डाला तो फैक्ट शीट हिलने लगा। विराट की सेंचुरी का इंतज़ार करते-करते हम थक चुके थे। लेकिन पाकिस्तान के खिलाफ एशिया कप के पहले मैच से ही चिराग की लौ रौशन होने लगी। विराट के पांव जिस तरह पिच पर हिल डुल रहे थे उससे लग रहा था कि सेंचुरी आने वाली है। सीधे बल्ले से खेलने के बदले जब विराट ने श्रीलंका के खिलाफ क्रॉस वाला शॉट मारने की कोशिश की तो संकेत मिल गए थे कि बंदे ने 2019 में जो आत्मविश्वास खोया था वो वापस आ गया है। ये बात और है कि बल्ले पर गेंद नहीं आई और वो खाता खोले बिना पैवेलिन लौट गए। जब अफगानिस्तान के खिलाफ वो ओपनिंग करने उतरे तो दो बातें साफ थीं। फुटवर्क और गेंद की लाइन लेंथ भांपने को लेकर जो मन में शक था वो नहीं है। पिछली दो हाफ सेंचुरी ने ये काम आसान कर दिया। दूसरा, ओपनिंग कर वो खुद को और अटैकिंग मोड में लाना चाहते हैं। सारे नुस्खे काम आ गए और विराट के बल्ले ने 71वीं सेंचुरी उगल दी। एक रिकॉर्ड तो तुरंत बन गया। ट्वेंटी-ट्वेंटी क्रिकेट में भारत की ये दूसरी सबसे बड़ी जीत थी। रनों के आधार पर।

शतकवीर विराट कोहली के टी-20 में अब 3584 रन हो गए हैं। पहले नंबर पर कप्तान रोहित शर्मा हैं। उनके 3620 रन हैं। लेकिन जब बैटिंग एवरेज की बात आती है तो विराट के आगे कोई दूर-दूर नहीं दिखाई देता। 51.94 के औसत से विराट ने बल्ले से कहर बरपाया है। इससे पता चलता है कि 1020 दिन बाद सेंचुरी भले लगी हो बल्ला चुप कभी नहीं हुआ था। कोहली ने 2018 में 11 इंटरनेशनल शतक लगाए थे। बैडलक शुरू हुआ 2019 के आखिर से। 23 नवंबर, 2019 को बांग्लादेश के खिलाफ 70वीं इंटरनेशनल सेंचुरी लगाने के बाद बल्ले की धार कुंद हो गई। वो धार जिसने ऑस्ट्रेलिया को घुटनों पर ला दिया। मुझे तो वो 2013 में जयपुर वाली पारी बार-बार याद आती है जब 52 गेंदों पर सेंचुरी ठोक कोहली ने हमें जीत दिलाई थी। 360 का टारगेट बौना पड़ गया था। 20-20 क्रिकेट की दुनिया में अब तक की सबसे धांसू पारी भी कोहली के नाम है जब 2016 में 51 गेंदों में 82 रन ठोक कर उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के गुरूर को मोहाली के मैदान में दफन कर दिया था। इसी कोहली को हम मिस कर रहे थे। हम उस तूफान को मैदान पर छाते हुए देखना चाहते थे जिसके कदम पड़ते ही एक्सप्रेस बोलरों की आंखों के आगे अंधेरा छा जाता था। 22 गज के बीसवें हिस्से से 90 गज लंबा सिक्सर मार कर पूरे मैदान और अरबों फैन्स के दिलों पर राज करने वाला कोहली उसी अंदाज में लौटा है। बीसवां हिस्सा से मेरा मतलब है स्टंप और स्टांस के बीच की दूरी।

लौट आया तूफान

दुबई के मैदान पर वही तूफान लौटा तो 53 गेंदों में सिक्सर मारते ही 71वीं सेंचुरी पूरी हो गई। क्या संयोग है। मोहाली वाली पारी 51 गेंदों वाली थी जिसमें 82 रन बने और आईसीसी ने टी-20 का मास्टरक्लास करार दिया। जयपुर वाली पारी में 52 गेंदों में सेंचुरी लगी थी। ये किसी भी भारतीय बैट्समैन की सबसे तेज सेंचुरी के तौर पर दर्ज है। और अब, 53 गेंदों वाली सेंचुरी। फॉर्म में तो थे ही वो एक टच गायब था जो सचिन को तेंदुलकर और कोहली को विराट बनाती है। वो मैजिकल टच इस पारी में देखने को मिली। विराट जब पारी खेल कर पैवेलियन लौट रहे थे तो पांच और रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके थे।

  • विराट कोहली ने नाबाद 122 रन बनाए जो टी-20 में किसी भी भारतीय बल्लेबाज का सर्वाधिक स्कोर है
  • इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे तेज 71 सेंचुरी मारने वाले बल्लेबाज बन गए विराट। ये रिकॉर्ड उन्हों 522 वें मैच में बनाया। सचिन तेंदुलकर ने इससे पहले 523 वें मैच में 71वीं सेंचुरी बनाई थी।
  • विराट कोहली के 122 रनों में से 63 रन आखिरी पांच ओवरों में बने जो किसी भी इंडियन बैट्समैन से ज्यादा है।
  • इंटरनेशनल क्रिकेट के सभी फॉरमैट में सेंचुरी मारने वाले चौथे भारतीय खिलाड़ी बने विराट कोहली
  • टी-20 में 100 से ज्यादा छक्के मारने वाले दूसरे भारतीय बैटर बने कोहली। उनसे ज्यादा छक्के का रिकॉर्ड रोहित शर्मा के पास है।

सचिन की तरह हर चौथे टेस्ट में शतक विराट की शख्सियत का हिस्सा बन चुका है। तो शतकों का सूखा निराश करने लगा। बांग्लादेश के खिलाफ सेंचुरी के बाद 18 टेस्ट मैचों में 32 पारियां खेल चुके विराट कोई सेंचुरी नहीं लगा पाए। ऐसा नहीं है कि बल्ला सूख गया था। इस दौरान छह हाफ सेंचुरी बनी लेकिन वो 79 के आगे नहीं बढ़ पाए। वनडे में 23 पारियां खेली और दस हाफ सेंचुरी भी लगाई लेकिन शतक से चूकते रहे। एशिया कप से पहले टी-20 में 27 मैच खेले और 43 की औसत से 858 रन बनाए लेकिन सेंचुरी नहीं लगी। फिर क्या था, दिन ढलने और कोहली का ताप घटने जैसी बातें होने लगीं। 2020, 2021 और 2022 कैलेंडर ईयर में 1000 रन नहीं बन पाए तो कोहली युग के अंत की कहानियां लिखी जाने लगीं।

2022 का रिकॉर्ड तो सचमुच मेरे जैसे उम्मीद वालों को भी हिलाने के लिए काफी था। एशिया कप से पहले 16 मैचों में विराट सिर्फ 476 रन बना सके। मतलब हर मैच में औसत मात्र 25 रन। लेकिन प्यारे पाकिस्तान ने कोहली की झोली में उस मैजिकल टच की वापसी कराई जिसने अफगानिस्तान के खिलाफ शतक की नींव रख दी। प्यारे पाकिस्तान इसलिए कि टी-20 में इस पुराने दुश्मन के खिलाफ कोहली का एवरेज है 67.66 और स्ट्राइक रेट 119 से ज्यादा। फिर क्या था कोहली ने रिकॉर्ड तोड़ने की शुरुआत कर दी फिफ्टी लगाकर। रोहित को पीछे छोड़ फटाफट शैली में सबसे ज्यादा हाफ सेंचुरी लगाने वाले प्लेयर बन गए विराट। फिर हॉंगकॉंग के खिलाफ दूसरी फिफ्टी। श्रीलंका के खिलाफ विराट ने निराश किया लेकिन आठ सितंबर, 2022 का दिन बेकार नहीं गया। श्रीलंका को धूल चटाने के बाद पाकिस्तान को खून के आंसू रूलाने वाली अफगान टीम कहीं से कमजोर नहीं कही जा सकती। लेकिन नबी को भी क्या पता था कि ये कोहली के विराट फॉर्म का रिटर्न है। ठीक वैसी वापसी जैसी सचिन की थी। 2007 वर्ल्ड कप की शर्मनाक विदाई के बाद सिडनी में ऑस्ट्रेलिया टूर पर।

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