इंडियन क्रिकेट के भीष्म पितामह रणजीत सिंह, जिनके लिए अंग्रेज भी आपस में लड़-भिड़े

नई दिल्ली: आजादी के बाद भारत में केवल राजा-रजवाड़े ही क्रिकेट खेला करते। उदाहरण के लिए आप पटियाला के महाराज, वडोदरा के महाराज गायकवाड़, पटौदी के नवाब और इंदौर के होलकर्स को शामिल कर सकते हैं। इन्हीं में एक थे जामनगर के महाराजा कुमार रणजीत सिंह, जिन्हें आज भारतीय क्रिकेट का पितामह कहा जाता है। रणजीत सिंह अगर आज जिंदा होते तो 150वां जन्मदिन मना रहे होते। 10 सितंबर 1872 को गुजरात के काठियावाड़ के सरोदर गांव में जन्में रणजीत सिंह को अपनी टीम में खिलाने के लिए अंग्रेज आपस में भिड़ गए थे।

लेग ग्लांस शॉट के जनक

दरअसल, 16 साल की उम्र में पढ़ाई के लिए इंग्लैंड गए रणजीत सिंह ने भारत में ही क्रिकेट सीखी। रणजी को उनकी निराली बल्लेबाजी के लिए जाना जाता था। रणजी अपने जमाने के ऐसे बल्लेबाज थे, जिनके पास कई तरह के स्ट्रोक की भरमार थी। वह रणजीत सिंह ही थे, जिन्होंने क्रिकेट को लेग ग्लांस जैसा शॉट दिया। कलाइयों का इस्तेमाल कोई उनसे सीखे। वह ऑन साइड के जादूगर थे। उस दौर में बैट्समैन सिर्फ ऑफ साइड में ही खेलता था। लेग साइड में फील्डर ही नहीं लगाया जाता। अगर बल्लेबाज गलती से भी उधर शॉट खेल लेता तो माफी मांगता था। इस परम्परा को तोड़ने वाले रणजीत सिंह थे।

इंग्लिश टीम में खेलने वाले पहले एशियाई

रणजीत सिंह का जब 1896 में इंग्लैंड टीम में चयन हुआ तब लार्ड हारिस इस चयन के खिलाफ थे, उनका कहना था कि रणजीत का जन्म इंग्लैंड में नहीं बल्कि भारत में हुआ है, इसलिए उन्हें साथ में नहीं खिलाना चाहिए। वो भारत की गुलामी का दौर था तब वह इंग्लिश टीम में शामिल होने वाले एशियाई मूल के पहले क्रिकेटर थे। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जुलाई 1896 में मैनचेस्टर में खेले गए अपने पहले टेस्ट मैच में ही 62 और नाबाद 154 रन की दो लाजवाब पारियां खेली थी।

रणजी ट्रॉफी रणजीत सिंह के नाम से
रणजीत ने अपने क्रिकेट करियर का पहला और आखिर मैच ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ और मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रेफ्फोर्ड मैदान पर खेला। 1904 में रणजीत भारत वापस आ गए। रणजीत का क्रिकेट के प्रति इतना प्यार था कि 48 साल के उम्र में वह प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेलना चाहते थे। 1907 में वह नवानगर के महाराजा बने। इस महान क्रिकेटर का 60 वर्ष की उम्र में 2 अप्रैल 1933 को जामनगर में निधन हुआ। उनके भतीजे दिलीप सिंह भी इंग्लैंड की तरफ से टेस्ट मैच खेले थे। 1934 में रणजीत के नाम पर भारत ने रणजी ट्रॉफी शुरू हुई। रणजीत को भारतीय क्रिकेट का जन्म दाता माना जाता है।

Asia cup 2022: कोहली का शतक और भुवी का पंच… माफ करना, ये उपलब्धियां इस एशिया कप में किसी काम की नहीं!Road Safety World Series: आज ग्रीन पार्क में बैटिंग करेंगे सचिन तेंडुलकर, लारा-रोड्स और दिलशान जैसे दिग्गजों से टक्कर

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published.